Monday, 20 March 2023

ख़ामोशी

 शहर का मिजाज़ यूं समझ रहे है , 

हम ख़ुद ही बेजुबान बन रहे है ।

आवाजों के बाजारों में , ख़ुद को 

ख़ामोश कर रहें है।


एक अदत ख़ामोशी ज़रूरी है 

सुकुन ए-शहर के लिए , 

हम संघर्षों में भी जीना ढूंढ रहें है।





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